Mirabai Chanu biography: गाँव से ओलिंपिक मैडल तक का सफ़र कैसे तय हुआ?

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मीराबाई चानू टोकियो ओलिंपिक 2020 में वेटलिफ्टिंग चम्पिंशिप में रजद पदक जीत कर भारत का नाम रोशन करनेवाली महिला का नाम तो सब ने सुना ही होगा मगर उनके जीवन बारे में बहुत कम लोगो ही पता होगा|

Mirabai Chanu किस राज्य से है ?| Mirabai Chanu belongs to which state?

मीराबाई चानू का पूरा नाम Saikhom Mirabai Chanu है| मीरा बाई चानू (Mirabai Chanu)का गाँव इम्फाल से 20 कम दूर नोंग्पोक काकचिंग नमक गाँव में रहती है. ये गाँव पहरों से चारो तरफ घिरा हुवा है. Mirabai Chanu का जन्म आर्थिक रूप से गरीब परिवार में हुवा था| Mirabai Chanu छह भाई-बहनों में सबसे छोटी थीं। Mirabai Chanu के पिता निर्माण श्रमिक के रूप में काम करते थे और उसकी माँ छोटी से चाय दूकान चलती थी| Mirabai Chanu का बचपन बहुत ही गरीबी और अभावों में गुजरा है|

Mirabai Chanu का बचपन

बचपन में जब Mirabai Chanu अपने भाइयों के साथ जंगल लकड़ी लाने जाती थी तो जिस वजन को भाइयों से उठाना मुश्किल होता ता उस वजन को Mirabai Chanu बड़ी अस्सानी से उठा कर कई किलोमीटर सफ़र तय कर घर पहुच जाती थी| यही नहीं, जैसा की आप अनुमान लगा सकते है की पहाड़ी इलाकों में पैदल चलना कितना कठिन होता है वैसे जगह में Mirabai Chanu सिर में पानी से भरा बाल्टी उठा कर बड़ी सहज से ले आती थी| घरवालो के अनुसार मीराबाई इतने भरी भरकम काम 5-6 साल की उम्र से कर रही है|

12 साल की उम्र में मीराबाई ने जब स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ़ india , इम्फाल का दौरा किया तब वहां संयोग से मणिपुर की एक अन्य महिला भारोत्तोलक कुंजारानी देवी की कुछ क्लिप देखीं, जो विश्व चैंपियनशिप में सात बार की रजत पदक विजेता थीं और 2006 के मेलबर्न राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीती थी| मीराबाई यह सब देख के बहुत प्रभावित हुई और मन ही मन उनके जिसे बनने ठान लिया|

Mirabai Chanu weightlifting में सफ़र :

लेकिन यह सफ़र इतना आसान नहीं रहा| Mirabai Chanu ने साल 2006 में अकादमी ज्वाइन कर लिया पर सबसे बड़ी परेशानी घर से अकादमी की दुरी 40 KM का होना था| उसके घरवाले और कोच समझाते रहे की रोज 40 KM यात्रा कर के कोचिंग करना काफी कठिन होगा| लेकिन मीराबाई ने हार नहीं मानी| कभी-कभी, वह एक ट्रक पर सवारी करती थी, कभी ऑटो मिलता था, तो वह कभी साइकिल चलाती थी, और कुछ दिन वह आधा रास्ते आती थी और फिर घर वापस चली जाती थी।

दो साल बाद, Mirabai Chanu ने राष्ट्रीय शिविर में जगह बनाई। सबसे पहले मीराबाई ने सब-जूनियर वर्ग में राज्य स्तर पर खिताब जीते, फिर 2011 में जूनियर वर्ग में पहला राष्ट्रीय पदक जीता। कुछ ही दिन बाद रास्इट्सरीय टीम में बुलावा आ गया| उसके बाद 2014 के राष्ट्रमंडल खेलों में उसने एक रजत जीता और खुद को दुनिया के सामने घोषित किया। और टोकियो ओलिंपिक 2020 में रजत पदक जीत कर देश का नाम रोसन कर दिया| मणिपुर सरकार ने मीराबाई चानू को सरकारी नौकरी के रूप में Assistant Superintendent of Police Sports में नियुक्त करने का फैसला किया है| उम्मीद है की मीराबाई के जीवन से लाखो लोग प्रेरणा ले कर,”कभी न हार मानने वाली जज्बे के साथ” जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रयास करेंगे|

Mirabai Chanu को हम सब की तरफ से ढेरों बधाइयाँ !!

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